कैविटेशन के कारण और प्रभाव, पंप में द्रव कैसे संचालित होते हैं, और पंप संरचना को कैसे सुरक्षित रखा जाता है।

कैविटेशन पंप द्रवों को कैसे संचालित करता है
कैविटेशन एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो पंपिंग सिस्टम्स पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। कैविटेशन तब होता है जब पंप के भीतर द्रव का दबाव अस्थाई रूप से इतना कम हो जाता है कि यह द्रव वाष्प में बदल जाता है। जब ये वाष्प बबल्स (गुब्बारे) टूटते हैं, तो ये पंप के श्रमिक भागों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
कैविटेशन का सिद्धांत
कैविटेशन तब उत्पन्न होता है जब पंप के अंदर प्रेशर इतना कम हो जाता है कि द्रव का वाष्प प्रेशर पहुंच जाए। यह दबाव में परिवर्तन सामान्यत: पंप की इंपेलर ब्लेड के आसपास होता है।
- द्रव (Liquid)
- वाष्प प्रेशर (Vapor Pressure)
- डायनामिक प्रेशर (Dynamic Pressure)
कैविटेशन प्रक्रिया
कैविटेशन प्रक्रिया इस प्रकार से होती है:
- द्रव पंप के अंदर एंटर करता है।
- इंपेलर ब्लेड द्रव को घुमाते हैं, जिससे प्रेशर और गति में फर्क आता है।
- जब प्रेशर वाष्प प्रेशर से कम हो जाता है, तो द्रव वाष्प में परिवर्तित हो जाता है और बबल्स का निर्माण होता है।
- ये बबल्स हाई प्रेशर क्षेत्र में पहुंचकर फट जाते हैं, जिससे ऊर्जा की रिहाई होती है।
कैविटेशन के प्रभाव
- घाटन (Erosion): टर्बुलेंस और बबल्स के फटने से मेटल का अपघटन हो सकता है।
- ध्वनि (Noise): बबल्स के फटने से उच्च शोर उत्पन्न होता है।
- कम एफिशिएंसी: पंप की कार्यक्षमता में कमी आ सकती है।
कैविटेशन को रोकने के उपाय
कैविटेशन को रोकने के लिए कुछ उपाय निम्नलिखित हैं:
- प्राइमिंग पंप का सही से इंस्टालेशन।
- प्रेशर को उपयुक्त स्तर पर बनाए रखना।
- पंप की डिजाइन में सुधार।
केवल इन साधारण उपायों को अपनाकर कैविटेशन की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।