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“तापीय चालकता मापन के 3 प्रकार”

तापीय चालकता मापन के 3 प्रकार जानें: स्टीडी स्टेट पद्धति, ट्रांज़िएंट हॉट वायर विधि, और लेज़र फ्लैश एनालिसिस का परिचय।

तापीय चालकता मापन के 3 प्रकार

तापीय चालकता (Thermal Conductivity) एक महत्वपूर्ण गुण है जो किसी पदार्थ की तापमान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरित करने की क्षमता को दर्शाता है। इसे मापने के कई तरीके हैं। इस लेख में हम तापीय चालकता मापन के तीन प्रमुख प्रकारों के बारे में चर्चा करेंगे:

  • स्थिर अवस्था मापन विधि
  • अनस्थिर अवस्था मापन विधि
  • लेज़र फ्लैश विधि
  • 1. स्थिर अवस्था मापन विधि

    स्थिर अवस्था मापन विधि (Steady State Measurement Method) में पदार्थ का तापीय चालकता मापन तब किया जाता है जब तापमान समय के साथ बदलता नहीं है। इसमें आमतौर पर गर्म स्रोत और ठंडा स्रोत के बीच तापमान भिन्नता को मापा जाता है। इससे होने वाले ताप प्रवाह का मापन कर, Fourier’s Law का उपयोग कर तापीय चालकता निकाली जाती है।

  • गर्म स्रोत और ठंडा स्रोत constant तापमान पर होते हैं।
  • Thermal conductivity की गणना हेतु प्रयोग किया जाने वाला समीकरण:
  • \[
    q = – k \cdot \frac{dT}{dx}
    \]

    यहां, \(q\) = हीट फ्लक्स, \(k\) = तापीय चालकता, \(\frac{dT}{dx}\) = तापमान का ग्रेडिएंट

    2. अनस्थिर अवस्था मापन विधि

    अनस्थिर अवस्था मापन विधि (Transient Measurement Method) में तापीय चालकता मापन तब किया जाता है जब तापमान समय के साथ बदलता रहता है। इस विधि का प्रमुख लाभ है कि यह अधिक तेज और कुछ ही समय में परिणाम देने वाली होती है।

  • उपकरण को specific temperature gradient प्रभावित करने दिया जाता है।
  • Thermocouples या अन्य तापमान संवेदकों का उपयोग कर समय के साथ तापमान परिवर्तन को रिकॉर्ड किया जाता है।
  • इस विधि में आम तौर पर सीधे मापन करने की बजाय, विशुद्ध आंकड़ों का प्रयोग कर गणना की जाती है।

    3. लेज़र फ्लैश विधि

    लेज़र फ्लैश विधि (Laser Flash Method) एक आधुनिक तरीका है जिसमें वस्तु के एक तरफ पर लेज़र दालों (laser pulses) का उपयोग कर तापमान में sudden परिवर्तन किया जाता है।

  • लेज़र दाल से ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिससे वस्तु में तापमान बढ़ने लगता है।
  • दूसरी तरफ पर तापमान वृद्धि का समय मापा जाता है।
  • तापीय चालकता का गणना एक विशिष्ट समीकरण का उपयोग कर किया जाता है:

    \[
    k = \frac{(d^2 \cdot \rho \cdot c_p)}{3 \cdot t_{1/2}}
    \]

    यहां, \(d\) = नमूना की मोटाई, \(\rho\) = पदार्थ का घनत्व, \(c_p\) = विशिष्ट ऊष्मा, \(t_{1/2}\) = आधे समय का बढ़ता तापमान

    इन तीन विधियों का उपयोग कर, विभिन्न पदार्थों की तापीय चालकता का मापन किया जा सकता है। हर विधि के अपने विशेष पहलू और उपयोग क्षेत्र हैं, जिससे वैज्ञानिक और इंजीनियर किसी वस्तु के तापीय गुणों का सटीक मापन कर सकते हैं।