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प्रवाह दृष्टिकरण तकनीकों के 9 प्रकार

प्रवाह दृष्टिकरण तकनीकों के 9 प्रकार: थर्मल इंजीनियरिंग में उपयोगी विधियाँ और उनके सिद्धांतों की जानकारी पाने के लिए पढ़ें।

प्रवाह दृष्टिकरण तकनीकों के 9 प्रकार

प्रवाह दृष्टिकरण तकनीकों के 9 प्रकार

थर्मल इंजीनियरिंग में, प्रवाह दृष्टिकरण तकनीकों का उपयोग तरल (फ्लूइड) और गैस के प्रवाह की विशेषताओं को समझने और विश्लेषण करने के लिए किया जाता है। ये तकनीकें हमें यह जानने में मदद करती हैं कि प्रवाह कैसे आगे बढ़ता है, उसमें उत्पन्न होने वाले बल, और उसकी गति। यहां हम 9 प्रमुख प्रवाह दृष्टिकरण तकनीकों की चर्चा करेंगे:

  • पार्टिकल इमेज वेलोसिमेट्री (PIV): इस तकनीक में, आमतौर पर छोटे कण प्रवाह में इंजेक्ट किए जाते हैं और उनकी चाल की ट्रैकिंग करके प्रवाह की गति प्रोफ़ाइल प्राप्त की जाती है।
  • लेज़र डॉप्लर वेलोसिमेट्री (LDV): यह तकनीक लेज़र का उपयोग करती है ताकि कणों की गति का माप लिया जा सके। यह द्रव की वेग गणना में सहायता करती है।
  • हॉट वायर एनोमोमेट्री: इस तकनीक में एक पतले तार का उपयोग किया जाता है, जो गर्मी उत्पन्न करता है। प्रवाह का तापमान तार को ठंडा करता है और इस प्रक्रिया में तार के प्रतिरोध में परिवर्तन किया जाता है, जिससे प्रवाह की गति मापी जाती है।
  • शैडोग्राफी: इसे शैडोग्राफी के माध्यम से थर्मल और प्रवाह की विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है। यह तकनीक लाइट शैडो का उपयोग करती है जो प्रवाह के माध्यम से गुजरता है।
  • स्क्लेरियोग्राफी: इस विधि में निष्क्रिय कणों को प्रवाह में इंजेक्ट किया जाता है और उनकी चाल की तस्वीरें ली जाती हैं। इससे प्रवाह की विशेषताएँ पता चलती हैं।
  • स्पेकल इंटरफेरोमेट्री: इसमें प्रयुक्त सामग्री में प्रतिरोधक तत्व शामिल होते हैं जो प्रवाह के गति से प्रभावित होते हैं। यह प्रवाह के गति प्रोफ़ाइल को मापने में मदद करती है।
  • ऑप्टिकल डॉप्लर वेलोसिमेट्री: यह ऑप्टिकल लेज़र सिस्टम का उपयोग करता है ताकि प्रवाह में गति का माप लिया जा सके।
  • च्युलेरियन दृष्टिकरण तकनीक: इस विधि के माध्यम से प्रवाह में वेग और अन्य मानदंडों की सीधी गणना की जाती है।
  • बालस्टिक वीडियोग्राफी: इस प्रणाली का उपयोग प्रवाह में अस्थिर कणों का वीडियो बनाने के लिए किया जाता है। वीडियो आधारित माप प्रवाह को बेहतर समझने में सहायता करता है।
  • उपरोक्त तकनीकें थर्मल इंजीनियरिंग में विभिन्न प्रकार के प्रवाह मापने और विश्लेषण करने में बहुत उपयोगी साबित होती हैं। नीचे हम इनमें से कुछ तकनीकों के बारे में अधिक विस्तार से जानकारी देंगे:

    पार्टिकल इमेज वेलोसिमेट्री (PIV)

    PIV तकनीक में फोटोग्राफी और कंप्यूटर इमेज प्रोसेसिंग का उपयोग किया जाता है। इसमें छोटे कणों को प्रवाह में इंजेक्ट किया जाता है और लेज़र शीट के माध्यम से उनकी फोटो ली जाती है। इन तस्वीरों का विश्लेषण कर के, प्रवाह की गति और दिशा का पता लगाया जाता है।

    लेज़र डॉप्लर वेलोसिमेट्री (LDV)

    LDV में लेज़र बीम का उपयोग होता है जो कणों से परावर्तित होकर विशिष्ट गति प्रदान करता है। परावर्तित प्रकाश का विश्लेषण कर के, कणों की गति और प्रवाह की विशेषताओं का पता लगाया जाता है।

    हॉट वायर एनोमोमेट्री

    इस तकनीक में एक पतला तार प्रवाह में डाला जाता है, जो गर्मी उत्पन्न करता है। प्रवाह के कारण तार ठंडा होता है और इसका ताप प्रतिरोध बदलता है। इस परिवर्तन द्वारा प्रवाह की गति का अनुमान लगाया जाता है।

    इस प्रकार ये प्रवाह दृष्टिकरण तकनीकें हमें तरल और गैस के प्रवाह को समझने और मापने में अत्यधिक सहायता करती हैं। इन तकनीकों के प्रेरित अध्ययन द्वारा, थर्मल इंजीनियरिंग में सुधार और विकास किया जा सकता है।