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निम्न-स्थल जलविद्युत संयंत्रों के लिए 6 प्रकार की कपलान टर्बाइन्स

निम्न-स्थल जलविद्युत संयंत्रों में उपयोग की जाने वाली कपलान टर्बाइन्स के 6 प्रकारों की जानकारी और उनके कार्य सिद्धांत।

निम्न-स्थल जलविद्युत संयंत्रों के लिए 6 प्रकार की कपलान टर्बाइन्स

निम्न-स्थल जलविद्युत संयंत्रों के लिए 6 प्रकार की कपलान टर्बाइन्स

निम्न-स्थल जलविद्युत संयंत्रों में जल की ऊंचाई कम होती है, मगर जल प्रवाह काफी अधिक होता है। इस प्रकार के संयंत्रों में उपयोग की जाने वाली टर्बाइन्स का चयन भी विशेष प्रकार का किया जाता है। कपलान टर्बाइन (Kaplan Turbine) इन संयंत्रों के लिए एक उपयुक्त विकल्प है। यहाँ हम निम्न-स्थल जलविद्युत संयंत्रों में उपयोग की जाने वाली 6 प्रकार की कपलान टर्बाइन्स के बारे में जानकारी देंगे।

  • रेग्युलर कपलान टर्बाइन (Regular Kaplan Turbine):

    यह कपलान टर्बाइन का सबसे सामान्य प्रकार है तथा इसे ऊँची प्रवाह दर वाली स्थितियों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें ब्लेड और गाइड वैन दोनों ही समायोज्य होते हैं।

  • एग्जियल फ्लो कपलान टर्बाइन (Axial Flow Kaplan Turbine):

    इस प्रकार की टर्बाइन में जल का प्रवाह अक्षीय दिशा में होता है, अर्थात जल वर्टिकल धारा के समांतर बहता है। इसे निम्न और मध्यम जल की ऊंचाई के लिए उपयोग किया जाता है।

  • बल्ब टर्बाइन (Bulb Turbine):

    बल्ब टर्बाइन में जनरेटर और टर्बाइन एक कॉम्पैक्ट यूनिट में सम्मिलित होते हैं। यह उच्च प्रवाह के साथ निम्न जल ऊंचाई के लिए आदर्श होता है।

  • ट्यूबाइन (Tubular Turbine):

    ट्यूबाइन टर्बाइन में जल एवं टर्बाइन ब्लेड की दिशा समान होती है। इसे सीधी नहरों या पाइपलाइन में स्थापित किया जा सकता है।

  • डायगonal कपलान टर्बाइन (Diagonal Kaplan Turbine):

    यह कपलान टर्बाइन का एक वैरिएशन है जिसमें ब्लेड जल की धारा में एक कोण पर स्थित होते हैं। उच्च प्रवाह के साथ निम्न और मध्यम ऊंचाई के लिए यह टर्बाइन उपयोगी होती है।

  • स्पाइरल केस कपलान टर्बाइन (Spiral Case Kaplan Turbine):

    इस प्रकार की टर्बाइन में जल का प्रवाह मृगाक्षीय रास्ते (स्पाइरल केस) के माध्यम से चलता है। इसकी डिज़ाइन जल की शक्ति को सही तरीके से नियंत्रित करने में सक्षम होती है।

  • इन सभी प्रकार की कपलान टर्बाइन्स का उपयोग जलविद्युत संयंत्रों की स्थितियों और विशेषताओं के आधार पर किया जाता है। यह टर्बाइन्स जल की ऊर्जा को यथासंभव अधिक विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने में मदद करती हैं और संयंत्र की क्षमता को बढ़ाती हैं।