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पिघले हुए नमक | ऊष्मा हस्तांतरण गुण और ऊर्जा संचयन उपयोग

पिघले हुए नमक के ऊष्मा हस्तांतरण गुण और ऊर्जा संचयन के उपयोग पर आधारित लेख, जिससे तापीय ऊर्जा को प्रभावी ढंग से संरक्षित किया जा सके।

पिघले हुए नमक | ऊष्मा हस्तांतरण गुण और ऊर्जा संचयन उपयोग

पिघले हुए नमक | ऊष्मा हस्तांतरण गुण और ऊर्जा संचयन उपयोग

ऊष्मा हस्तांतरण और ऊर्जा संचयन के क्षेत्र में पिघले हुए नमक (मो‍ल्टन सॉल्ट) का महत्व लगातार बढ़ रहा है। पिघले हुए नमक का उपयोग उच्च तापमान पर ऊर्जा को प्रभावी रूप से संग्रहीत करने और स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

पिघले हुए नमक के प्रकार

  • सोडियम क्लोराइड (NaCl): यह सामान्य टेबल नमक है, जिसका उपयोग उच्च तापमान पिघलाव बिंदु के लिए किया जाता है।
  • पोटेशियम नाइट्रेट (KNO3): यह नमक, जिसे साल्टपीटर के नाम से भी जाना जाता है, ऊर्जा संचयन के लिए उपयोगी है।
  • सोडियम नाइट्रेट (NaNO3): इसे चिली सॉल्टपीटर भी कहा जाता है और इसे ऊर्जा संचयन में प्रयोग किया जाता है।
  • ऊष्मा हस्तांतरण गुण

    पिघले हुए नमक के ऊष्मा हस्तांतरण गुण इस प्रकार होते हैं:

  • उच्च तापमान सहनशीलता: पिघले हुए नमक को उच्च तापमान (500°C-800°C) तक सहन करने की क्षमता होती है, जो इसे केंद्रीय ऊर्जा स्रोतों के लिए उपयुक्त बनाता है।
  • विशिष्ट ऊष्मा क्षमता (Specific Heat Capacity): पिघले हुए नमक में उच्च विशिष्ट ऊष्मा क्षमता होती है, जो उसे ऊर्जा संचयन में प्रभावी बनाता है। उदाहरण के लिए, NaNO3 का विशिष्ट ऊष्मा क्षमता 1.01 J/gK है।
  • न्यूनतम ऊष्मा नुकसान: पिघले हुए नमक के निम्न थर्मल कंडक्टिविटी के कारण ऊष्मा नुकसान कम होता है।
  • ऊर्जा संचयन में उपयोग

    ऊर्जा संचयन में पिघले हुए नमक के कुछ प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं:

  • सौर ऊर्जा संचयन (Solar Energy Storage): सोलर थर्मल पावर प्लांट्स में पिघले हुए नमक का उपयोग सूर्य से प्राप्त ऊष्मा को संग्रहीत करने के लिए किया जाता है। यह थर्मल बफर के रूप में कार्य करता है, और ऊर्जा को रात के समय या बादलों के दिनों में भी उपयोग किया जा सकता है।
  • थर्मल एनर्जी स्टोरेज (Thermal Energy Storage – TES): हाई-टेम्परेचर थर्मल एनेर्जी स्टोरेज सिस्टम में पिघले हुए नमक को एक संवहन माध्यम (Working Fluid) के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसका उपयोग औद्योगिक हीटिंग और कूलिंग सिस्टम्स में भी होता है।
  • पिघले हुए नमक के इन विशेष गुणों के कारण ऊर्जा संचयन और ऊष्मा हस्तांतरण की प्रक्रिया में इसकी उपयोगिता निरंतर बढ़ती जा रही है।